Jama Masjid Shamsi
Budaun ki medieval विरासत ka ek grand landmark, apne विशाल courtyard, elevated structure aur iconic dome ke liye jaana जाता है।
History, faith and local memory
जामा मस्जिद शम्सी उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर के मध्य स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की मस्जिद है। इसका निर्माण दिल्ली सल्तनत के शासक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (Shamsuddin Iltutmish) द्वारा 13वीं शताब्दी में कराया गया था। यह उत्तर भारत की सबसे प्राचीन जामा मस्जिदों में से एक है और आज भी नियमित रूप से नमाज़ अदा की जाती है। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक (Monument of National Importance) है।
इतिहास
इल्तुतमिश ने बदायूं के गवर्नर रहने के दौरान इस मस्जिद के निर्माण का आदेश दिया। अधिकांश ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इसका निर्माण 1210 से 1223 ईस्वी के बीच पूरा हुआ। बाद में 16वीं शताब्दी में आग से क्षतिग्रस्त होने के बाद मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में इसका पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कराई गई, जिससे इसके वर्तमान गुंबद और कुछ अन्य भाग बने।
स्थापत्य कला
- मस्जिद का निर्माण फ़ारसी (Persian) और अफ़गानी (Afghan) स्थापत्य शैली से प्रभावित है।
- इसका मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 100 फीट ऊँचा माना जाता है।
- मस्जिद में कुल 8 गुंबद हैं, जिनमें मध्य का विशाल गुंबद सबसे आकर्षक है।
- फर्श सफेद संगमरमर से बना है।
- परिसर में एक हौज़ (जलाशय) तथा वुज़ू के लिए अलग स्थान बने हुए हैं।
- मस्जिद एक ऊँचे टीले (सोथा मोहल्ला) पर स्थित है, जिससे यह पूरे शहर की प्रमुख पहचान बनती है।
विशेष महत्व
- यह भारत की सबसे पुरानी सक्रिय जामा मस्जिदों में से एक मानी जाती है।
- एक समय यह देश की सबसे बड़ी जामा मस्जिदों में गिनी जाती थी। बाद में दिल्ली की जामा मस्जिद बनने के बाद इसका स्थान बदला।
- मस्जिद में लगभग 20,000 से 23,500 नमाज़ी एक साथ नमाज़ अदा कर सकते हैं।
- ईद और जुमे की नमाज़ के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
संरक्षण
जामा मस्जिद शम्सी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय धरोहर है। इसकी ऐतिहासिक और वास्तुकला संबंधी विशेषताओं के कारण यह बदायूं आने वाले पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।
संक्षिप्त तथ्य
विषयविवरणस्थानमौलवी टोला, बदायूं, उत्तर प्रदेशनिर्माण काल1210–1223 ईस्वीनिर्मातासुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिशस्थापत्य शैलीफ़ारसी एवं अफ़गानी शैलीनिर्माण सामग्रीलाल बलुआ पत्थर एवं सफेद संगमरमरसंरक्षित स्मारकभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)क्षमतालगभग 20,000–23,500 नमाज़ीनिष्कर्ष
जामा मस्जिद शम्सी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बदायूं की लगभग 800 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। इसकी भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और आज भी जीवंत धार्मिक परंपरा इसे उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मस्जिदों में स्थान दिलाती है।
Location on Google Maps
Jama Masjid Shamsi, Budaun


